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प्रिय पर्यावरण प्रेमी मित्रों, नमस्कार और सुप्रभात। 🙏 जागो तभी सवेरा। इस प्रलयकारी पर्यावरण संकट के संबंध में जब भी आप जागे, तभी सवेरा समझें ! ! !

सन् २०१७ और २०१८ के दरम्यान मैं और मेरे मित्र श्री धीरज शेषराव मेश्राम ने मिलकर ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के बारे में बहुत ही गहराई से चिंतन मनन किया था। इससे पहले हमने वायु प्रदूषण और उससे जुड़े ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन को इतना गंभीर विषय नहीं माना था। ऐसा लगता था कि इतनी बड़ी धरती, पृथ्वी ग्रह सबकुछ दफ़न कर देती है।
सन २०१७ और २०१८ में हम दोस्तों को थोड़ा खाली समय मिला। मेरा छोटा भाई विजय गणपतराव गोविन्दवार को चौथे स्टेज का गले का कैंसर का पता चला था। मुझे अपना धंधा बंद कर उसकी दुकान विजय हैंडलूम कमाल चौंक नागपुर संभालनी पड़ी थी। वहीं बैठ कर हम दोनों दोस्त इस विषय पर सोचा करते थे। सुबह ११ बजे से लेकर रात दस बजे तक। समापन इंदौर नमकीन के होटल में चाय पी कर करते थे। करीब नव महिने इस विषय पर सोचा।
इस विषय पर हम इंटरनेट पर सर्च करते थे। दुनिया में इस विषय पर कौन कहा क्या काम कर रहा है ? उसकी जांच पड़ताल करते थे। अधिकतर युरोप अमेरिका में विश्वविद्यालय में रिसर्च वर्क हो रहा था। इससे आगे बात नहीं बढ़ रही थी। आज़ भी पृथ्वी ग्रह के तापमान को कम करने पर ठोस काम नहीं हो रहा है। प्रदूषण घटाने पर बात होती है और काम नहीं होता है।
बढ़ता प्रदूषण और तपती धरती को राहत देने वाले अनेक लोग इस विषय पर काम कर रहे थे। उनमें से हम भी एक थें। हमारे चिंतन का मुख्य विषय था कैसे सुरज की रोशनी पृथ्वी ग्रह पर पहुंचने से पहले रोका जाए ? अंतरिक्ष में छत्री लगाकर थोड़ी रोशनी कम की जाएं। परंतु यह बिलीयन डालर प्रोजेक्ट था। या हर शहर के लिए ड्रोन वाली छत्री से बादल बनाकर सूरज की रोशनी कम की जाएं ? या धरती पर चमकिले बादलों का निर्माण किया जाएं ? बादलों की संख्या बढ़ाकर भी धरती मां को तपने से बचाया जा सकता है।
ऐसे अनेकों उपाय पर हम दोनों बचपन के मित्रों ने चिंतन मनन किया। हम भविष्य के छांव शेडों सेलर बनना चाहते थे। हम दोनों मित्रों को विज्ञान में बहुत रुचि है। यह विषय हमारे काम का था।
इससे पहले सायलो साइबिन की मदद से कभी हमने अपराध मुक्त दुनिया का भी सपना देखा था। मनुष्य जाति अपने भीतर और बाहर दोनों प्रकार के प्रदूषण से प्रभावित है। प्रदूषित विचार बाहर वायु प्रदूषण, साउंड प्रदूषण पैदा करता है। इसलिए भीतर से प्रदूषण मुक्त होना आवश्यक है।
हम दोनों मित्रों ने सोचा कि प्रदूषण घटाने पर जोर देने से बेहतर होगा कि गर्मी से राहत दिलाने पर काम किया जाएं।
इस सिलसिले में मेरे मित्र श्री धीरज युरोप में, युक्रेन भी दो साल रहकर आएं थे। वहां भी कुछ लोग इस विषय पर काम करने वाले लोग मिले। असल में मेरे मित्र श्री धीरज शेषराव मेश्राम का हीरों का थोक व्यापार है। उसकी और मेरी रुचि का विषय पर्यावरण है। सुरक्षित संरक्षित संवर्धित पर्यावरण के बगैर हमारा जीवन सुखमय नहीं बन सकता है।
आपकी जानकारी के लिए प्रदूषण कम करके ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से बचने और बचाने का समय निकल चुका है। प्रदूषण घटाकर भी कुछ नहीं होगा। पृथ्वी का औसत तापमान दो डिग्री बढ़ चुका है।
हर साल तूफान , चक्रवात और हीट वेव जैसे ४०० से ज्यादा विनाशकारी प्राकृतिक आपदाएं आ रहे हैं। दो दशक पहले इनकी संख्या १०० से भी कम थी।
अब अंतिम उपाय योजना यह है।
जियो इंजीनियरिंग की मदद से अंतरिक्ष से एक दो प्रतिशत सूर्य की रोशनी रोककर छांव का निर्माण किया जा सकता है। इस प्रयास से तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है।
यह रोज नकली सुर्य ग्रहण लगाने जैसे होगा। असल में हमारा सपना शेडों सेलर बनने का है। जो कि अब भी अधूरा है। इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। ग्रीन नेट शेड मंगल मंडप युक्त क्लाइमेट कूलर के उपयोग को बढ़ावा देकर हमारे सपने की शुरुआत हुई है।
दूसरा उपाय यह छांव अंतरिक्ष में विशालकाय सोलार पैनल युक्त छत्री लगाकर प्राप्त कर सकते है। इससे निर्मित बिजली पृथ्वी पर भेजकर कोयलें को जलाने बच सकते है और प्रदूषण को भी कम कर सकते है। यह इस तरह की आख़री उपाय योजना होगी।
जब तापमान नियंत्रण से बाहर हो जाएगा। मौसम बुरी तरह से बिगड़ जाएंगे। बाढ़ और तूफान, चक्रवात और हीट वेव से पृथ्वी का जीवन ख़तरे में पड़ जाएगा। धूर्वों की बर्फ पिघल कर थल को जलमग्न कर देगी।
दूसरा उपाय बहुत ही सस्ता और सरल है। सभी मकान और बड़ी इमारतों की छतों को ढांककर छांव का निर्माण किया जाएं। सीमेंट कंक्रीट से बने मकानों को गर्म होने से बचाया जाए। सभी घरों पर ग्रीन नेट शेड मंगल मंडप युक्त क्लाइमेट कूलर लगाया जाएं। छतों पर भी बादलों के निर्माण की व्यवस्था की जाएं। यह एक बहुत ही सस्ता, सरल और उपयोगी उपाय होगा। जो वातावरण को गर्म होने से बचाएगा। तापमान को नियंत्रित करने में मदद करेगा। इस महा प्रयोग को हमने अपने शहर नागपुर में करने की ठानी है। यह हमारा अपना शहर है। यहीं के हम बाशिंदे है। देखना है कि क्लाइमेट कूलर की मदद से गर्मी में नागपुर का तापमान कितना कम किया जा सकता है ! प्रदूषण भी कितना घटाया जा सकता है !
इस महा प्रयोग का लक्ष्य यही है। इसके लिए नागपुर के शहरवासियों की मदद और सहयोग की आवश्यकता है।
इस प्रयोग की सफलता निकट भविष्य में देश और दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन की वजह से बढ़ती गर्मी से निपटने में मार्गदर्शन कर सकती है।
यह दुनिया का सबसे प्रयोग होगा। एक बड़े क्षेत्रफल में फैला महा प्रयोग होगा। नागपुर शहर का क्षेत्रफल लगभग चार सौ स्केअर किलोमीटर है।
इस महा प्रयोग को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए नागपुर वासियों का समर्थन और सहयोग की सख्त आवश्यकता है। आशा है कि नागपुरवासी अपने घर पर ग्रीन नेट शेड मंगल मंडप लगायेंगे। अपने घर को गर्म होने से बचाएंगे। नागपुर को गर्मी में ठंडा रखने में मदद करेंगे। इस तरह के प्रयास अगर सारी दुनिया में होने लगें तो ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद हो सकती है।
इस तरह से आप के छोटे महान प्रयास पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन में मददगार सिद्ध होंगे। इस धरती मां को आपकी इस तरह की सेवाओं की सख्त जरूरत है। इस बुढ़ी होती धरती मां के काम आइए । उसको ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से बचाइए।
सुजलाम सुफलाम मलयज शीतलाम धरती मां अगली पीढ़ी को भी काम में आएं। नोबेल पुरस्कार प्राप्त कवि गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर ने इसी धरती मां , पृथ्वी ग्रह को नमन करते हुए वंदे मातरम् कहा है।
इसी मंगल कामना के साथ इस धरती मां को छांव का आंचल प्रदान करने का काम शुरू करें। ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगाए। अपनी अपनी छतों पर क्लाइमेट कूलर युक्त ग्रीन नेट शेड मंडप जरूर लगाएं।
हो सके तो फागिंग मशीन की सहायता से वहां से बादलों का भी निर्माण करें। बादल सूरज की रोशनी रोककर एक कवच का काम करते हैं। थोड़ा सोचें इस बारे में। धन्यवाद। 🙏🙏🙏

आपके शुभचिंतक पर्यावरण प्रेमी